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पीरियडà¥à¤¸ की वजह से शरीर और मन में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ चलता है? शायद लड़कियों को à¤à¥€ नहीं पता!
हाल ही में हमने वरà¥à¤²à¥à¤¡ मेंसटà¥à¤°à¥à¤…ल हाइजीन डे मनाया। पीरियडà¥à¤¸ के दौरान साफ-सफाई को लेकर तमाम बातें की गईं। आपने à¤à¥€ कई आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•लà¥à¤¸ पढ़े होंगे, लेकिन पीरियडà¥à¤¸ के कà¥à¤› पहलू à¤à¤¸à¥‡ हैं, जिन पर कम बातें होती हैं।
à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ महिला अपनी जिंदगी के 40 साल रेगà¥à¤²à¤° पीरियडà¥à¤¸ में बिताती है। हर महीने कई हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलावों से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥€ है। इसका उसके शरीर और मेंटल हेलà¥à¤¥ पर गहरा असर पड़ता है। हम यहां पीरियडà¥à¤¸ के इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कम डिसà¥à¤•स होने वाले पहलà¥à¤“ं की कहानी पेश कर रहे हैं।
मिनारà¥à¤•ी: मेंसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤à¤¶à¤¨ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤
जब किसी लड़की को पहली बार पीरियडà¥à¤¸ होते हैं तो उसे मिनारà¥à¤•ी कहते हैं। ये आमतौर पर 10-13 साल की उमà¥à¤° में होते हैं। जब कोई लड़की किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ में पहà¥à¤‚चती है तब उसके ओवरी à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¨ नाम के हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने लगते हैं। इसके बाद ओवरी à¤à¤— रिलीज करती है। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¨ की वजह से यूटà¥à¤°à¤¸ की परत मोटी होने लगती है। जब à¤à¤— फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤¡à¤œ नहीं होता है तो ये परत टूट जाती है जिससे पीरियडà¥à¤¸ आते हैं।
मेनोपॉज: जब खतà¥à¤® होने लगता है मेंसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤¶à¤¨
मेनोपॉज तब होता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियडà¥à¤¸ नहीं आते हैं। इसके बाद महिला नेचà¥à¤°à¤²à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट नहीं हो सकती है। दरअसल, 45-55 की उमà¥à¤° के बीच महिलाओं के शरीर में ओवरी à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ रिलीज करना कम कर देती है जिसे पीरियडà¥à¤¸ कम आते हैं। मेनोपॉज के लकà¥à¤·à¤£ आखिरी पीरियड से करीब 4 साल पहले दिखने लगते हैं। इस दौरान महिलाओं को सिरदरà¥à¤¦, बदन दरà¥à¤¦, नींद न आना, à¤à¤‚गà¥à¤œà¤¾à¤¯à¤Ÿà¥€, ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥‹à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ यानी हडà¥à¤¡à¥€à¤¯à¤¾à¤‚ कमजोर होना, जैसी कई परेशानियां होती हैं।
ये तो हो गई मिनारà¥à¤•ी और मेनोपॉज की बात। अब ये जानते हैं कि पीरियडà¥à¤¸ में होने वाले हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² चेंज का असर शरीर और दिमाग पर कैसे पड़ता है?
पहले जानते हैं कि इसका महिलाओं के शरीर पर कà¥à¤¯à¤¾ असर होता है?
पीरियडà¥à¤¸ से पहले होता है पà¥à¤°à¥€ मेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤…ल सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (PMS)
पीरियडà¥à¤¸ आने के 3-7 दिन पहले बॉडी में कà¥à¤› बदलाव होते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ की कमी होने से पीरियडà¥à¤¸ आते हैं, लेकिन अचानक आठइस चेंज के कारण कई दिकà¥à¤•तों का सामना करना पड़ता है। इसमें पेट-पीठऔर कमर में दरà¥à¤¦, मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚गà¥à¤¸, थकान, चिड़चिड़ापन, गैस होना, टिशू में पानी जमा होना, चकà¥à¤•र आना और बेहोशी तक शामिल है।
पीरियडà¥à¤¸ के दौरान होते हैं कà¥à¤°à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¥à¤¸
पीरियडà¥à¤¸ के दौरान अधिकतर महिलाओं को पेट में दरà¥à¤¦ होता है जो कई बार कमर और पैरों में à¤à¥€ महसूस होता है। कà¥à¤› महिलाओं को ये दरà¥à¤¦ इतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है कि इसका असर उनके काम पर à¤à¥€ पड़ता है। दरअसल, महिलाओं की कोख में पीरियडà¥à¤¸ के दौरान पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤¨ नाम का हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ निकलता है जिससे यूटà¥à¤°à¤¸ पर दबाव पड़ता है। यही पेट में दरà¥à¤¦ का कारण होता है।
2014 में NGO डासरा की à¤à¤• रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हर साल करीब 23 मिलियन लड़कियां पीरियडà¥à¤¸ आने पर सà¥à¤•ूल जाना बंद कर देती हैं। 2016 में YouGov ने BBC के लिठà¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡ किया जिसमें सामने आया कि 52% महिलाà¤à¤‚ पीरियड पेन या कà¥à¤°à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¥à¤¸ से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥€ हैं, जिसका सीधा असर उनके काम पर होता है। वहीं हर 10 में से 9 महिलाओं ने माना कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¤à¥€ न कà¤à¥€ पीरियड पेन से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ा है।
पीरियड कà¥à¤°à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¥à¤¸ के दरà¥à¤¦ को कà¥à¤› यूं समà¤à¤¾ जा सकता है
à¤à¤• इंसान का शरीर 45 डेल यूनिट दरà¥à¤¦ सहन कर सकता है। वहीं बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के लिठà¤à¤• औरत 57 डेल यूनिट तक का दरà¥à¤¦ सहन करती है। दरअसल, जनà¥à¤® के दौरान बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का मà¥à¤‚ह 6-10 सेमी तक खà¥à¤² जाता है। जिससे होने वाला दरà¥à¤¦ 20 हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के à¤à¤• साथ टूटने जैसा होता है। वहीं पीरियडà¥à¤¸ के दौरान बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का मà¥à¤‚ह (सरà¥à¤µà¤¿à¤•à¥à¤¸) 2-3 सेमी तक खà¥à¤²à¤¤à¤¾ है जिससे तेज दरà¥à¤¦ महसूस होता है। डॉ. जेन गनटर के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, इस दौरान उतना दरà¥à¤¦ होता है जितना बिना à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ के उंगली काटने पर होगा।
पीरियडà¥à¤¸ का असर सिरà¥à¤« फिजिकली ही नहीं बलà¥à¤•ि हमारे दिमाग पर à¤à¥€ पड़ता है…
PMDD: आपने PMS के बार में जान लिया। इसी के à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‚सà¥à¤¡ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ को पà¥à¤°à¥€-मेंसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤…ल डिसà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¿à¤• डिसऑरà¥à¤¡à¤° यानी PMDD कहते हैं। 3-8% महिलाà¤à¤‚ PMDD का शिकार हैं। इसमें गंà¤à¥€à¤° डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, थकान, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगाने में दिकà¥à¤•त और पैनिक अटैक तक आ सकते हैं।
सेरोटोनिन की कमी: पीरियड के दौरान शरीर में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ की कमी होती है। इसकी वजह से दिमाग से रिलीज होने वाले कà¥à¤› केमिकलà¥à¤¸ पर à¤à¥€ असर पड़ता है। रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ कम होने की वजह से दिमाग से सेरोटोनिन हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ à¤à¥€ कम निकलता है। सेरोटोनिन को | हैपà¥à¤ªà¥€ केमिकल | à¤à¥€ कहा जाता है। इस केमिकल की कमी की वजह से महिलाà¤à¤‚ उदास और डिपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤¡ रहने लगती हैं। ये कई बार पैनिक अटैक का कारण बनता है।
बॉडी और लà¥à¤• में बदलाव: पीरियडà¥à¤¸ के कारण होने वाले हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव की वजह से उदास होना, बिना बात के गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ आना आम बात है। हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² चेंज के कारण महिलाओं के वजन बढ़ता-घटता है। साथ ही बॉडी हेयर गà¥à¤°à¥‹à¤¥ और सà¥à¤•िन à¤à¤•à¥à¤¨à¥‡ के कारण आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ कम होने लगता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।
तो पीरियड का शरीर और दिमाग पर कà¥à¤¯à¤¾ असर होता है ये हमने जान लिया। अब जानते हैं पीरियड से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बिमारियों के बारे में…
सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾ वेबसाइट के 2020 के सरà¥à¤µà¥‡ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 20 से 29 साल की महिलाओं में 16% पोलिसिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® या PCOS से पीड़ित थी। इस बिमारी के पीछे मà¥à¤–à¥à¤¯ वजह खराब लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² को बताया गया।
तो ये PCOS/PCOD कà¥à¤¯à¤¾ होता है: महिलाओं की ओवरीज से निकलने वाले हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ ही पीरियडà¥à¤¸ मैनेज करते हैं। जब इनà¥à¤¹à¥€ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ का इमà¥à¤¬à¥ˆà¤²à¥‡à¤‚स होता है तो उस कंडीशन को PCOS/PCOD कहा जाता है। इसमें कई बार पीरियडà¥à¤¸ कà¥à¤› महीनों के गैप पर आते हैं। इस वजह से पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काफी दिकà¥à¤•तें आती हैं। इसके अलावा चेहरे पर दाने निकलना और शरीर पर बालों की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गà¥à¤°à¥‹à¤¥ होना à¤à¥€ इसी कंडीशन की वजह से होता है। समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ने पर बांà¤à¤ªà¤¨ और डायबिटीज à¤à¥€ हो सकती है।
अब तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिला है। मगर समय रहते डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लेने पर इसे कंटà¥à¤°à¥‹à¤² जरूर किया जा सकता है। साथ ही महिलाà¤à¤‚ अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में मामूली बदलाव करके PCOS को काबू में कर सकती हैं।
यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ (UTI): यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वैजाइना में होने वाला इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है जो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ लेवल कम होने की वजह से होता है। पीरियडà¥à¤¸ के दौरान निकलने वाले बà¥à¤²à¤¡ की वजह से कई बार वैजाइना का à¤à¤¸à¤¿à¤¡ लेवल घट जाता है, जिससे UTI होने की खतरा रहता है। इस दौरान वैजाइना में तेज जलन और दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।
जेनिटल टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨: ये à¤à¤• तरह का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है जो पीरियड के दौरान होने वाले हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव की वजह से होता है। दरअसल, वैजाइना में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ लेवल को बनाठरखने का काम लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤¾à¤ˆ नाम का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करता है। पीरियड के दौरान हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² बदलाव की वजह से ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मरने लगते हैं जिसकी वजह से जेनिटल टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है।
रीपà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ (RTI): मेंसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥à¤à¤¶à¤¨ के दौरान अगर साफ-सफाई का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न रखा जाठतो à¤à¥€ महिलाओं को कई बीमारियां हो सकती हैं। इनमें से à¤à¤• है रीपà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ यानी RTI। इसकी वजह से कई बार महिलाà¤à¤‚ मां नहीं बन पाती हैं।
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